ग्राम विकास अभियान (2011-12)
ग्राम विकास अभियान (2011–12)
म.प्र. जन अभियान परिषद् का मूल उद्देश्य स्वैच्छिकता तथा सामूहिकता की भावना से ग्राम में स्वप्रेरणा के आधार पर स्वावलंबन के प्रमाण स्थापित करना है। इस दृष्टि से मान. मुख्यमंत्री जी की पहल ‘‘आओ बनाएं अपना स्वर्णिम म.प्र.’’ कार्यक्रम के त्वरित विस्तार हेतु प्रदेश के विभिन्न प्रस्फुटन तथा स्पंदन ग्रामों में श्रमदान एवं संवाद के माध्यम से ग्राम स्तर पर जन-जागृति का कार्य किया गया। इस हेतु ग्राम विकास यात्रा के अंतर्गत जिले के समस्त विकासखण्ड विकास यात्राओं के माध्यम से श्रमदान संवाद की गतिविधियां संपादित की जाकर प्रदेश के अधिकाधिक व्यक्तियों में स्वावलंबन का भाव उत्पन्न किया गया। इस हेतु समस्त विकासखण्ड की प्रस्फुटन समितियों व स्पंदन ग्रामों के स्वैच्छिक संगठनों, स्थानीय लोक संस्कृति तथा भाषा के धारा प्रवाह कला मंडलियों के सहयोग से यात्रा संपन्न की गई।
यात्रा के मुख्य उद्देश्य यात्रा निम्न मुख्य उद्देश्यों को लेकर निकाली गई:-
- सामूहिक प्रयत्नों से आत्मनिर्भरता।
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इस सत्य से परिचित होना कि जीवन की हर कठिनाई और आवश्यकता आपस के सहयोग से हल हो सकती है। हर कार्य हेतु सरकार पर निर्भर रहने की मानसिकता को बदलने का यह प्रयास हैं।
प्रदेश के समस्त 50 जिलों के 18,000 ग्रामों के ग्रामीण अंचलों में सामाजिक सहभागिता एवं स्वावलम्बन के भाव को सुदृढ करने के उद्देश्य से ग्राम विकास अभियान का आयोजन परिषद् द्वारा किया गया।
अभियान की प्रमुख गतिविधियाँ
नुक्कड नाटक, कलश यात्रा, पद यात्रा, रैली, ग्रामवासियों के साथ संवाद, बुजुर्गो का सम्मान, सास्कृतिक कार्यक्रम, प्रतियोगितायें, दीवार लेखन, श्रमदान, प्रचार प्रसार सामग्री का वितरण के माध्यम से 1,80,00,000 व्यक्तियों से संपर्क कर मान. मुख्यमंत्री जी का ग्रामवासियों को स्वावलंबन का संदेश दिया गया, जिसमें 22,000 नुक्कड नाटकों की प्रस्तुति दी गई।