मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद्

(योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग, मध्यप्रदेश शासन)

उद्देश्य

उद्देश्य

म.प्र. जन अभियान परिषद ने सृजनात्मक और सकारात्मक सोच से सहभागिता द्वारा एक संतुलित संसार के निर्माण की अभिकल्पना की है। ऋग्वेद का ‘संगच्छध्वम् संवदध्वम्‘ मंत्र सदियों से हमें साथ चलने, साथ बढने की प्रेरणा देता है। यही भाव लोकतंत्र का है और जन अभियान परिषद का भी। परिषद के निम्‍नलिखित उद्देश्‍य निर्धारित किये गये हैं –

  • राज्य शासन एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के मध्य विकास के सभी क्षेत्रों में सहयोग को प्रोत्साहित करना तथा सम्बन्धित विषयों पर शासन को सलाह देना।
  • राज्य में स्वयंसेवी संस्थाओं की स्थापना तथा संचालन के लिए अनुकूल वातावरण का निर्माण तथा इसके लिए नीतियां तैयार करना।
  • शासन की नीतियों, कार्यक्रमों, योजनाओं के क्रियान्वयन में स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी से सम्बन्धित प्रक्रियाओं की जानकारी एकत्र करना तथा प्रचार करने के लिए समन्वय अभिकरण के रूप में कार्य करना।
  • स्वयं सेवी संस्थाओं के कार्यक्षेत्र तथा प्रभाव क्षेत्र के आधार पर उसका वर्गीकरण एवं मूल्यांकन करना तथा उनकी सूची संधारित कर, इच्छुक व्यक्तियों/हितार्थियों की सूची पत्र का संधारण कर चाहने वालों को उपलब्ध करवाना।
  • राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं से समन्वय कर स्वयंसेवी संस्थाओं की गतिविधियों को बढ़ाने के लिए जानकारी एकत्र कर उपलब्ध करवाना।
  • शासकीय विभागों द्वारा संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन में स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विभागीय कार्यक्रमों/नियमों में परिवर्तन करने में मदद करना।
  • शासन से एवं शासनोत्तर व्यवस्थाओं से नई व पुरानी स्वयंसेवी संस्थाओं को तकनीकी, प्रबंधकीय एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाना।
  • स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा बहुउद्देशीय अभिनव परियोजनायें प्रारंभ करने हेतु शासन के विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय का कार्य करना तथा प्रदेश के आध्‍यात्मिक विकास हेतु अद्वेतवाद का प्रचार-प्रसार करना।
  • स्वयंसेवी संस्थाओं, शासकीय विभागों, नगरीय प्रशासन की संस्थाओं तथा पंचायत राज संस्थाओं में प्रबंधन सहभागिता तथा संवाद की क्षमता को बढ़ाने, विचारों तथा सूचनाओं के आदान-प्रदान तथा विकास के विभिन्न मुद्दों का समय बढ़ाने के उद्देश्य से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
  • आर्थिक तथा सामाजिक विकास एवं पर्यावरण संरक्षण आदि के विशिष्ट कार्यक्रम एवं योजनाओं का क्रियान्वयन स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से करने हेतु एक कोष की स्थापना कर अनुदान उपलब्ध करवाना।
  • राज्य के सभी स्तरों पर विकास गतिविधियों में स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने की प्रगति की समीक्षा तथा परीवीक्षा कर या वांछित आवश्यकतानुसार सुधार हेतु सुझाव देना। उपयुक्त तकनीक, सामुदायिक नेतृत्व, सहभागिता, प्रशिक्षण एवं विकास के क्षे़त्रों में अभिनवता को प्रोत्साहित करना।

अंतिम नवीनीकरण:16 Sep, 2025