नवांकुर
नवांकुर योजना
1) अवधारणा :
परिषद का मूल उद्देश्य प्रदेश में समाज एवं शासन के मध्य सेतु के रूप में कार्य करना है। विकास के कार्यों में समाज की सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु यह आवश्यक है कि समाज विकास के विभिन्न विषयों में दक्ष स्वैच्छिक संगठन उपलब्ध हों। अत: विभिन्न विषयों जैसे जल संरक्षण, सबको शिक्षा सहित भारतीय संस्कारों की शिक्षा, नशामुक्ति, सबको स्वास्थ्य, हरियाली/पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता एवं साफ सफाई, ऊर्जा संरक्षण, कृषि को लाभकारी बनाना,कुपोषण एवं परिवार नियोजन, सामाजिक समरसता तथा विवाद रहित समाज/ग्राम आदि पर विशेषज्ञता रखने वाले स्वैच्छिक संगठन प्रत्येक सेक्टर स्तर पर विकसित किये जायेगें। इन स्वैच्छिक संगठनों द्वारा सेक्टर में गठित प्रस्फुटन समितियों को उनके कार्यों में आवश्यक सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान किया जायेगा, वहीं मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास पाठयक्रम के छात्रों को इंटर्नशिप कराई जायेगी तथा पाठयक्रम संबंधी परामर्श प्रदान किया जावेगा। समाज की स्वैच्छिक प्रवृत्ति को प्रोत्साहन देने हेतु प्रति वर्ष प्रत्येक विकासखण्ड में 05 (प्रत्येक विकासखण्ड में प्रति सेक्टर हेतु 01 नवांकुर संस्था के मान से) का चयन कर प्रति वर्ष प्रोत्साहन राशि रूपये 01.00 लाख निरंतर (कार्य संतोषजनक पाए जाने पर) प्रदान की जावेगी। यह संस्थायें उस विकासखण्ड के सेक्टर हेतु लीड स्वैच्छिक संगठन के रूप में कार्य करेंगी। इस प्रकार योजनांतर्गत स्वैच्छिक संगठनों के उन्मुखीकरण एवं पोषण हेतु जिला स्तर पर गठित समिति के माध्यम से प्रदेश में 1565 स्वैच्छिक संगठनों का चयन किया जायेगा।
2) लक्ष्य :
सेक्टर स्तर पर सक्रिय प्रस्फुटन समितियों/नवीन स्वयंसेवी संस्थाओं का उन्मुखीकरण एवं पोषण करना तथा सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में इनकी भागीदारी सुनिश्चित करते हुये आत्म निर्भर मध्यप्रदेश का निर्माण करना।
3) उद्देश्य :
- ऐसे स्वैच्छिक संगठन का निर्माण करना जो विकास के प्रमुख विषयों में विशेषज्ञता रखते हो।
- विकास के प्रमुख विषयों पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करने हेतु विषय विशेषज्ञ/स्वैच्छिक कार्यकर्ता तैयार करना।
- स्वैच्छिक संगठनों के माध्यम से योजनाओं के संचालन हेतु परियोजना निर्माण तथा क्रियान्वयन करना।
- सतत् विकास लक्ष्य को प्राप्त करने में स्वैच्छिक संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए विकास प्रक्रिया में नागरिक समुदाय को शामिल करना।
- सामाजिक सुरक्षा एवं समरसता सुनिश्चित् करना।
- केन्द्र एवं राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार एवं उनके क्रियान्वयन में सहयोग करना।
- नवीन व स्थानीय संस्थाओं का पोषण व उनका क्षमतावर्द्धन करना।
4) चयन हेतु पात्र संस्थायें :
योजनांतर्गत संस्थाओं के चयन हेतु परिषद की वेबसाइट पर विज्ञप्ति जारी की जावेगी। नवांकुर संस्थाओं का चयन पूर्व में (वर्ष 2009-10 से 2018-19 तक) गठित उसी विकासखण्ड की सक्रिय नगर/ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों/स्थानीय पंजीकृत संस्थाएं में से किया जायेगा:
- उन नगर/ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों को प्राथमिकता दी जावेगी जिनके द्वारा संबंधित विकासखण्ड अंतर्गत लगातार तीन वर्ष तक कार्य किया गया हो तथा परिषद द्वारा संचालित कार्यक्रमों/अभियानों में उनकी निरन्तर भागीदारी रही हो।
- म.प्र. फर्म्स एवं संस्थायें पंजीकरण अधिनियम 1973 के अंतर्गत वे ही पंजीकृत संस्थाएं मान्य होगी जिनमें 50 प्रतिशत सदस्य संबंधित विकासखण्ड तथा 50 प्रतिशत सदस्य संबंधित जिले के स्थानीय निवासी हो।
5) चयन समिति का गठन :
नवांकुर योजनांतर्गत चयन हेतु इच्छुक संस्थाएं ऑनलाइन आवेदन परिषद के पोर्टल पर करेंगी। प्राप्त आवेदनों में से अंतिम चयन जिला स्तरीय समिति द्वारा किया जावेगा। जिला स्तरीय समिति की संरचना निम्नानुसार होगी:
- अध्यक्ष – संभाग समन्वयक (म.प्र. जन अभियान परिषद)
- सदस्य सचिव – जिला समन्वयक (म.प्र. जन अभियान परिषद)
- सदस्य – म.प्र. जन अभियान परिषद द्वारा नामांकित एक विकासखण्ड समन्वयक
- सदस्य – संबंधित जिले के जिला समन्वयक द्वारा नामांकित अच्छी छवि वाले समाज के दो प्रतिष्ठित नागरिक/स्वयंसेवी संगठन के प्रतिनिधि
जिला स्तरीय समिति द्वारा चयनित संस्थाओं के साथ परिषद द्वारा अनुबंध किया जावेगा।
नोट: चयन संबंधी किसी प्रकार के विवाद का निपटारा कार्यपालक निदेशक, म.प्र. जन अभियान परिषद द्वारा किया जायेगा।
6) समिति के कार्य :
प्रदेश में सतत् विकास लक्ष्य 2030 की प्राप्ति के लिए सेक्टर अंतर्गत गठित प्रस्फुटन समितियों का क्षमता वर्धन, प्रस्फुटन समितियों के कार्यों का मूल्यांकन एवं अनुश्रवण करना तथा विभिन्न विभागों यथा महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, सामाजिक कल्याण विभाग, नगरीय कल्याण विभाग, स्वास्थ्य विभाग एवं आयुष विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग तथा किसान कल्याण एवं कृषि विभाग की प्रमुख विकास/जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सेक्टर अंतर्गत गठित प्रस्फुटन समितियों के साथ मिलकर शासन का सहयोग करना।
उक्त योजनाओं का प्रचार-प्रसार, योजना से लाभार्थियों की जानकारी तथा शेष बचे हितग्राहियों की सूची तैयार कर संबंधित विभाग को उपलब्ध कराना। योजनाओं का मूल्यांकन व अनुश्रवण, सामाजिक अंकेक्षण एवं प्रभाव का विश्लेषण कराना।
विभाग एवं उनकी कुछ महत्वपूर्ण योजनाएं इस प्रकार है-
| क्रमांक | प्रमुख विभाग | योजना |
|---|---|---|
| 1 | महिला एवं बाल विकास | लाडली लक्ष्मी योजना |
| 2 | पंचायत एवं ग्रामीण विकास |
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) मुख्यमंत्री ग्रामीण पथ विक्रेता योजना स्वसहायता समूहों को क्रेडिट लिंकेज |
| 3 | सामाजिक न्याय एवं नि:शक्त जन कल्याण |
इन्दिरा गांधी वृद्धावस्था पेंशन योजना इन्दिरा गांधी विधवा पेंशन योजना इन्दिरा गांधी नि:शक्त पेंशन योजना मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना |
| 4 | नगरीय विकास एवं आवास |
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना |
| 5 | लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण | आयुषमान भारत- निरामयम मध्यप्रदेश योजना |
| 6 | लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग | जल जीवन मिशन |
| 7 | किसान कल्याण एवं कृषि विकास |
कृषि अवसंरचना कोष प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना |
| 8 | राजस्व विभाग | स्वामित्व योजना |
| 9 | नवकरीण ऊर्जा | ऊर्जा साक्षरता अभियान |
| 10 | लोक सेवा प्रबंधन | सी.एम. जनसेवा योजना |
शासन के निर्देशानुसार अन्य विभागों की योजनाओं के क्रियान्वयन में भी सहयोग प्रदान किया जाएगा।
योजनाओं से संबंधित कार्य- संबंधित सेक्टर में गठित प्रस्फुटन समितियों के माध्यम से उक्त समस्त योजनाओं का प्रचार-प्रसार कराना, योजना से लाभार्थियों की जानकारी तथा शेष बचे हितग्राहियों की सूची तैयार कराना, संबंधित विभाग को उपलब्ध कराना। प्रस्फुटन समितियों के माध्यम से योजनाओं का मूल्यांकन व अनुश्रवण, सामाजिक अंकेक्षण एवं प्रभाव का विश्लेषण कराना।
अन्य कार्य:
- स्थानीय समस्याओं/मुद्दों का चिन्हांकन कर उनके समाधान हेतु कार्ययोजना का निर्माण करना, प्रस्फुटन समितियों एवं स्थानीय लोगों के साथ मिल कर समाधान हेतु कार्य करना।
- प्रति विकासखण्ड सेक्टरवार 01नर्सरी की स्थापना कराना तथा विकास के अन्य विषयों जैसे - जल संरक्षण, सबको शिक्षा सहित भारतीय संस्कारों की शिक्षा, नशामुक्ति, सबको स्वास्थ्य, हरियाली/पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता एवं साफ सफाई, ऊर्जा संरक्षण, कृषि को लाभकारी बनाना,कुपोषण एवं परिवार नियोजन, सामाजिक समरसता तथा विवाद रहित समाज/ग्राम आदि पर सामाजिक सहभागिता से कार्य हेतु प्रस्फुटन समितियों को सहयोग व मार्गदर्शन करना।
- वाचनालय/जनसूचना केन्द्र/शिक्षा केन्द्र का संचालन कराना।
- संस्था के रूप में समस्त औपचारिक बैठकें आयोजित करना एवं समस्त दस्तावेजों का संधारण करना।
- मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास पाठयक्रम के छात्रों को इंटर्नशिप कराना तथा पाठयक्रम संबंधी परामर्श प्रदान करना।
- प्रत्येक सेक्टर में एक आदर्श ग्राम (वृक्षा रोपण, जल संरक्षण, सोर उर्जा, डिजिटल ग्राम तथा स्वच्छता आदि विषयों पर शत प्रतिशत उपलब्धि) का निर्माण करना।
- किये गये कार्यों की जानकारी नियमित रूप से परिषद के पोर्टल पर अपलोड करना।
7) प्रोत्साहन राशि (बजट) :
- संस्थाओं द्वारा परिषद की पोर्टल पर अपनी गतिविधियों की जानकारी अपलोड किया जाना उनकी सक्रियता का सूचक होगा।
- प्रत्येक संस्था को उसकी सक्रियता के आधार पर प्रतिवर्ष प्रोत्साहन राशि राशि रू. 01.00 लाख (दो किश्तों में) निरंतर निम्नानुसार दिए जाने का प्रावधान।
‘परिषद की प्रबंध समिति (संबंधित विकासखण्ड, जिला एवं संभाग समन्वयक) द्वारा वित्तीय वर्ष के प्रत्येक छ: माह में नवांकुर संस्था द्वारा किये गये कार्यों के प्रतिवेदन का आंकलन किया जावेगा। कार्य संतोषजनक पाए जाने पर प्रबंध समिति की अनुशंसा अनुसार प्रथम/द्वितीय किश्त की राशि नवांकुर संस्था के खाते में हस्तांतरित की जावेगी।