मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद्

(योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग, मध्यप्रदेश शासन)

राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार (2011-12)

राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार (2011–12)

मध्यप्रदेश की भौगोलिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक विविधिता के कारण यहां सभी को पेयजल उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है। हमारा प्रदेश देश का हृदय प्रदेश है जिसकी आत्मा ग्राम में निवास करती है। हमारी लगभग 74 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामों में रहती है जिसमें से लगभग 38 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास पीने योग्य पानी नहीं है। जल तभी उपयोगी होगा जब वह प्रदूषण रहित एवं शुद्ध हो। इसके विपरीत अशुद्ध जल, विष के समान है जिससे जीवन समाप्त होना तय है।

राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम- पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु सरकार द्वारा पूर्व में कई कार्यक्रमों का संचालन किया गया परंतु वे सभी लोगों की मांगों के अनुरूप नहीं थे इसीलिए अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हो सके। सरकार को यह महसूस हुआ कि पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु कार्यक्रम तभी सफल हो सकेंगे जब वह लोगों की मांग के आधार पर बनाए गए हों तथा सभी कार्यक्रम समुदाय द्वारा स्वयं नियोजित क्रियान्वित एवं संचालित किए जाएं। समुदाय स्वयं कार्य करे एवं कार्यों का अनुश्रवण तथा मूल्यांकन भी स्वयं करे तभी सुरक्षित जल उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। इसी सोच के आधार पर राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम का प्रादुर्भाव हुआ। इसका तात्पर्य पेयजल प्रदाय हेतु जन सहभागिता के आधार पर ऐसी योजना है जो भविष्य के लिए सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित कर सके।

राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम का लक्ष्य मात्र पेयजल प्रदाय करना ही नहीं अपितु यह सुनिश्चित करना भी है कि लोगों को आने वाले वर्षों में सुरक्षित पेयजल पर्याप्त मात्रा में सुविधाजनक स्थान पर वर्ष भर उपलब्ध हो सके। इस कार्यक्रम का मूल आधार जनसहभागिता के आधार पर किए गए प्रयास हैं। इस कार्यक्रम के प्रमुख बिन्दु निम्नानुसार हैं:-

कार्यक्रम के प्रमुख बिंदु

  1. जल प्रदाय नियमित हो प्रतिदिन नियत समय पर नियत अवधि के लिए जलापूर्ति हो।
  2. जल प्रदाय पर्याप्त मात्रा में रहे।

  3. सुरक्षित उत्तम गुणवत्ता का जल प्रदाय रहे।

प्रदेश में ग्रामीण समाज को पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित पेयजल सुविधाजनक स्थान पर वर्ष भर उपलब्ध हो सके इस उद्देष्य से व्यापक स्तर पर जन जागरण का कार्य प्रदेश के समस्त 9000 नल-जल ग्राम में परिषद् द्वारा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सहयोग से किया गया।

लक्ष्य- प्रदेश में ग्रामीण समाज को पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित पेयजल सुविधाजनक स्थान पर वर्ष भर उपलब्ध हो सके इस हेतु व्यापक स्तर पर जन जागरण।

प्रमुख उद्देश्य

  1. समुदाय को सुरक्षित जल के उपयोग की आवश्‍यकता के संबंध में जानकारी देना।
  2. समुदाय को जल परीक्षण के महत्व के बारे में जागरूक करना।

  3. समुदाय को ग्राम सभा के माध्यम से जल सरंक्षण एवं अन्य विषयों पर आपसी सहयोग से निर्णय   लेकर कार्य करने हेतु जागृत करना।

  4. तदर्थ स्वास्थ्य ग्राम समिति के कार्यों एवं दायित्वों की जानकारी लोगों को देना।

  5. जल एवं स्वच्छता के संबंध में ग्रामवासियों में समझ विकसित करना।

  6. वर्षा जल के संवर्धन एवं जल के पुनःचक्रण व पुनःउपयोग के संबंध में लोगों को जागरूक करना।

  7. समुदाय को जल की गुणवत्ता के परीक्षण एवं जल के शुद्धिकरण से संबंधित आधुनिक तकनीकों के   विषय में जानकारी देना।

प्रमुख गतिविधियां

नुक्कड नाटक, मेला, होर्डिंग और बैनर, समुदाय आधारित ग्राम आकलन (जल स्त्रोत एवं उपयोगिता आधारित), स्कूल रैली तथा  प्रचार-प्रसार सामग्री- लीफ्लेट एवं पोस्टर का वितरण गतिविधि का संचालन। परिणामस्‍वरूप प्रदेश के सभी जिलों के लगभग एक करोड लोगों के मध्य गतिविधियों के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया गया, जिसमें गीत नाटिका 906, दीवार लेखन 8779, पी.आर.ए. 862, नुक्कड़ नाट्क 3027, स्कूल रैली 2848 एवं मेला 44 आयोजित किये गये।

 

 

 

 

 

 

 

अंतिम नवीनीकरण:29 Jan, 2026