मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद्

(योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग, मध्यप्रदेश शासन)

लोकसेवा प्रदाय ग्यारंटी अधिनियम के प्रभाव का आंकलन (2011-12)

लोकसेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम के प्रभाव का आंकलन (2011–12)

म.प्र. के लोकसेवाओं के प्रदाय की गारंटी अधिनियम 2010 मान. मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान द्वारा प्रदेश में किये जा रहे सुशासन के प्रयासों में महत्वपूर्ण कडी है। लोगों के लिए बनाई गई सेवाओं को प्राप्त करने के लिए आम जन को किसी की इच्छा पर निर्भर न रहना पड़े तथा उन्हें आवश्यक सेवा समय पर उपलब्ध हो सके इस उद्देश्य से लोक सेवा अधिनियम का प्रारंभ किया गया। इस अधिनियम का उद्देश्य यह भी है कि प्रशासन से आम जन को जो दैनंदिनी कार्य होते है उन्हें करने के लिए लोक सेवक भी सतर्क रहे और अपने उत्तर दायित्वों का प्रभावी रूप से निर्वहन करें। इसलिए इस अधिनियम के अंतर्गत सेवाओं के प्रदान के लिए समय सीमा निर्धारित की गई है एवं यदि लोक सेवकों द्वारा समय सीमा के अनुरूप सेवायें प्रदाय नही की गई तो उन्हें आर्थिक एवं अन्य दण्ड का प्रावधान भी है। इस हेतु अधिनियम के क्रियान्वयन का चिन्हित सेवाओं के प्रदाय पर प्रभाव तथा नागरिकों की इस पर प्रक्रिया का मूल्यांकन किया जाना अपेक्षित है। इस कार्य हेतु जन अभियान परिषद् से प्रदेश के 10 संभाग के 20 जिलों के दो-दो विकासखण्डों में सर्वेक्षण किया गया। लोक सेवा प्रबंधन विभाग के सहयोग से परिषद् लोक सेवा प्रदाय ग्यारंटी अधिनियम के विषय में आमजनों तथा जनप्रतिनिधि में जानकारी के स्तर तथा चिन्हांकित 9 विभागों द्वारा प्रदत्त 26 सेवाओं के प्रभाव का ऑकलन किया गया। आंकलन निम्न बिन्दुओं पर केन्द्रित रहा-

आंकलन के मुख्य बिंदु

  1. अधिनियम का प्रभाव।

  2. अधिनियम के क्रियान्वयन में सुधार हेतु लोगो के सुझाव।

  3. अधिकारियों/कर्मचारियों के अनुभव के आधार पर अधिनियम की प्रभावशीलता एवं इसके क्रियान्वयन में आने वाली बाधाएँ।

प्रदेश के 43 जिलों के 86 विकासखण्ड में आवेदकों तथा आम नागरिकों का सर्वेक्षण किया गया, जिसमें 3220 आवेदक, तथा 660 आम नागरिकों के साथ संपर्क किया गया। लोकसेवा प्रदाय ग्यारंटी अधिनियम के विषय में आमजनों, अधिकारी कर्मचारियों तथा जनप्रतिनिधियों में जानकारी के स्तर तथा चिन्हाकिंत 09 विभागों द्वारा प्रदत्त 26 सेवाओं के प्रभाव के आंकलन हेतु तीन चरणों में सर्वे किया गया। प्रथम चरण में प्रदेश के 11 जिलों के 22 विकासखण्डों के 1320 लोगों का, द्वितीय चरण में प्रदेश के 20 जिलों के 40 विकासखण्डों के 1600 नागरिकों तथा 199 अधिकारी/कर्मचारियों का तथा तृतीय चरण में प्रदेश के 12 जिलों के 24 विकासखण्डों के 960 नागरिकों तथा 120 अधिकारी/कर्मचारियों का सर्वे किया गया। प्रदेश के 43 जिलों के 86 विकासखण्डों में सर्वे कार्य सम्पादित किया गया।

अंतिम नवीनीकरण:29 Jan, 2026