म.प्र. ज.अ.प. द्वारा ‘’सृजन योजनान्तर्गत पांरपरिक देशज ज्ञान-विज्ञान कौशल कला, साहित्य व खेलो के संरक्षण एवं संवर्धन’’ हेतु वर्ष 2022-23 मे समस्त जिलों के स्वैच्छिक संगठनों से परियोजना प्रस्ताव आंमत्रित हैं।
म.प्र. ज.अ.प. द्वारा ‘’सृजन योजनान्तर्गत पांरपरिक देशज ज्ञान-विज्ञान कौशल कला, साहित्य व खेलो के संरक्षण एवं संवर्धन’’ हेतु वर्ष 2022-23 मे समस्त जिलों के स्वैच्छिक संगठनों से परियोजना प्रस्ताव आंमत्रित हैं।
सृजन योजना
मध्यप्रदेश के ग्रामीण अंचल कला-संस्कृति से समृद्ध है। लोगों में पारम्परिक ज्ञान-विज्ञान, कौशल, कला, साहित्य व खेलों की प्रतिभा है। उद्योगों के आधुनिकीकरण के चलते पारम्परिक विधियों से निर्मित उत्पादों का चलन लगातार घटता चला जा रहा है। एक ओर जहां पारम्परिक ज्ञान एवं कौशल में दक्ष व्यक्ति अपनी आजीविका हेतु रोजगार के अन्य साधनों की ओर उन्मुख हो रहे है तथा नई पीढ़ी भी इस ज्ञान को प्राप्त करने हेतु प्रेरित नहीं हो पा रही है वहीं दूसरी ओर ऐसे व्यक्ति जो वर्तमान में भी इन पारम्परिक कार्यों में लगे हुए हैं वे स्पष्ट उद्देश्य एवं पूर्ण समर्पण होने के पश्चात भी उचित मार्गदर्शन, सहयोग एवं वित्त पोषण न मिल पाने के कारण अपने प्रयासों का उचित परिणाम प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। परिषद् की सृजन योजना में प्रत्येक जिले में से ऐसे व्यक्तियों को चिन्हित कर आवश्यकता अनुसार सहयोग देकर उनकी प्रतिभा तथा सृजनात्मक कार्यों को व्यवसायिक स्तर पर स्थापित किया जावेगा। सुदूर ग्रामीण अंचलों में छुपी हुई प्रतिभाओं को चिन्हित कर उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों में विभक्त कर, उनके ज्ञान कौशल और विशेषज्ञता का दस्तावेजीकरण किया जाएगा। इस प्रकार उन्हें उचित प्रशिक्षण एवं संसाधन उपलब्ध कराकर स्वरोजगार आदि के माध्यम से व्यवसायिक क्षेत्र में स्थापित किया जा सकेगा। इस हेतु पारम्परिक देशज ज्ञान-विज्ञान, कौशल, कला, साहित्य व खेलों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु स्वैच्छिक संगठनों से प्रस्ताव आमंत्रित कर उन्हें अनुदान राशि प्रदान की जावेगी।